सुप्रीम कोर्ट ने कहा : केंद्र के हाथ में आम आदमी की दीवाली, लोन मोहलत में देरी ना करे

लोन पर मोहलत से दौरान चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने के मामले में बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार के हाथ में आम आदमी की दीवाली है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, “जिन्होंने 2 करोड़ तक का ऋण लिया है इसे लागू करने के लिए औपचारिकताएं कब पूरी की जाएंगी?” इस पर केंद्र ने जवाब दिया, “राहत देने की बाहरी सीमा 15 नवंबर है. सरकार एक बड़ा बोझ उठा रही है, लेकिन हम इस आंकड़े का उल्लेख नहीं कर रहे हैं. सरकार द्वारा दी गई राहत जो भी लागू होगी, यह हो जाएगा.”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम लोग चिंतित हैं. हम 2 करोड़ तक के ऋण वाले लोगों से चिंतित हैं. केंद्र ने जवाब दिया कि यह 15 नवंबर तक केवल कुछ औपचारिकताओं द्वारा किया जाएगा. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को एक महीने की जरूरत क्यों है? हम इस निर्णय के लिए सरकार की आवश्यकता के साथ सहमत नहीं हैं. जब आपने निर्णय ले लिया है कि एक महीने की देरी क्यों हो रही है?

हमारे विचार में निर्णय को लागू करने के लिए एक महीने की आवश्यकता नहीं है और यह सरकार की ओर से उचित नहीं है.” जस्टिस शाह ने कहाँ की दिवाली आने वाली है और इससे उन्हें मदद मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देरी आम आदमी के हितों में नहीं है. आम आदमी की दुर्दशा देखें. हम आदेश पारित नहीं कर रहे हैं. आम आदमी की दुर्दशा पर विचार करें. छोटे लोगों के लिए राहत देना एक स्वागत योग्य निर्णय है. लेकिन कुछ ठोस परिणामों की जरूरत है.

मामले में सुनवाई जारी है. वहीं केंद्र ने अदालत को सूचित किया था कि उसने निजी व्यक्तियों सहित 8 क्षेत्रों के लिए 2 करोड़ तक के ऋणों के पुनर्भुगतान पर चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने का निर्णय लिया है. केंद्र ने कहा है कि वह  विभिन्न क्षेत्रों को अधिक राहत नहीं दे सकता है और अदालतों को राजकोषीय नीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

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