रोग से लड़ने वाले पौधे, जो आपको जरूर नियमित रूप से खाने चाइये

यह काफी हद तक सच है कि औषधीय पौधे कई बीमारियों के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. अथर्ववेद में औषधीय पौधों (Medicinal plants) के साथ-साथ उनके उपयोग किए जाने वाले विभिन्न तरीकों का भी उल्लेख किया गया है. कटे हुए और घाव का इलाज करने के लिए, मलेरिया, टाइफाइड और बुखार को कम करने के लिए औषधीय पौधों का उपयोग किया जाता है.

इन्हीं औषधीय पौधों से बहुत सी बीमारियों के लिए दवाएं भी बनाई जाती हैं. लेकिन, अगर आपके घर या आसपास औषधीय पौधे हैं, तो आप इउनका इस्तेमाल अपनी कई बीमारियों के उचार के लिए बड़ी आसानी से कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि वे कौन से औषधीय पौधे हैं, जिनका आप उनके प्राकृतिक रूप में सेवन करें, तो वे आपके लिए कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकते है.

नीम (Neem)

नीम (Neem)

नीम के पेड़ की छाल, इसकी पत्तियों, बौर और फलों का उपयोग मसूड़ों और दांतों को साफ करने के लिए किया जाता है, इन्हें त्वचा की कई समस्याओं के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.  नीम का पेड़ एक अद्भुत लाभ वाला पेड़ है. नीम के पत्तों का सेवन रक्त को शुद्ध (Blood Purify) करता है. इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण एक कवकनाशी के रूप में कार्य करते हैं और प्रभावी रूप से एक्जिमा, सोरायसिस और रूसी के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है.

तुलसी (Tulsi)

तुलसी (Tulsi)

तुलसी को हमेशा से भारत में रक्त को शुद्ध करने वाली मानी जाती रही है. गले के विकारों के इलाज में इसकी पत्तियों से बनी चाय बहुत कारगर है. तुलसी से बने अर्क का इस्तेमाल घाव और त्वचा की समस्याओं के लिए किया जाता है.

एनाइज (Anise)

एनाइज (Anise)

एनाइज(Anise) पौधे के बीज का उपयोग पेट फूलना, शूल और पाचन तंत्र की बीमारियों से निपटने के लिए किया जाता है. एनाइज एक नाजुक पौधा है और कभी-कभी बच्चों को खांसी की दवा के रूप में दिया जाता है.

दालचीनी (Cinnamon)

दालचीनी (Cinnamon)

दालचीनी एक उत्प्रेरक की तरह काम करता है. यह रक्त को शुद्ध करता है और संक्रमण से निपटने में भी मदद कर सकता है.

मेथी (Fenugreek)

मेथी (Fenugreek)

मेथी फेफड़ों में संक्रमण को कम करती है. मेथी की तरह, धनिया मसाले के रूप में उपयोग किया जाता है और इसका औषधीय महत्व है. मधुमय में भी यह बहुत लबदायक है.

कैमोमाइल (chamomile)

कैमोमाइल (chamomile)

कैमोमाइल पौधा अपने एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है. इसका उपयोग जुकाम से सुरक्षा के लिए, बैक्टीरिया के संक्रमण से लड़ने के लिए, अवसाद और चिंता का इलाज करने के लिए, मासिक धर्म में ऐंठन के लिए, मांसपेशियों की ऐंठन के इलाज के लिए और अनियमित नींद के पैटर्न का इलाज करने के लिए किया जाता है.

शेयर करे

Be the first to comment

Leave a Reply