क्या है स्वामित्व योजना, क्या फायदे होंगे इस योजना के, पढ़े और समझे

यह योजना ग्रामीण इलाकों में मौजूद घरों पर उनके मालिकों का मालिकाना हक दस्तावेजों के साथ सुनिश्चित करने के लिए है. स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण इलाकों की जमीनों का सीमांकन ड्रोन सर्वे टेक्‍नोलॉजी के जरिए होगा और ग्रामीण इलाकों मे मौजूद घरों के मालिकों के मालिकाना हक का एक रिकॉर्ड बनेगा.

इन रिकॉर्ड्स के जरिए वे अपनी संपत्ति को फाइनेंशियल एसेट के तौर पर इस्तेमाल कर सकेंगे और बैंक से कर्ज या अन्य वित्तीय सुविधाएं लेने में कर सकते हैं. इसके अलावा इससे जमीन से जुड़े कानूनी झगड़े कम करने में मदद मिलेगी. पंचायती राज मंत्रालय इस योजना को लागू कराने वाला नोडल मंत्रालय है. राज्‍यों में योजना के लिए राजस्‍व/भूलेख विभाग नोडल विभाग हैं. ड्रोन्‍स के जरिए प्रॉपर्टी के सर्वे के लिए सर्वे ऑफ इंडिया नोडल एजेंसी है.

ग्रामीण आबदी वाले क्षेत्रों में निवासियों की भूमि का इस्तेमाल ड्रोन्स के जरिए नई सर्वेक्षण विधियों का उपयोग किया जाएगा जिसमें पंचायती राज मंत्रालय, राज्य राजस्व विभागों और भारतीय सर्वेक्षण मंत्रालय की मदद मिलेगी।

ऐसा होने के बाद लोगों को इसके बहुत फायदें होंगे। इससे ग्रामीण संपत्ति के मालिकों को आर्थिक फायदा होगा और संपत्ति को लेकर होने वाले झगड़े भी खत्म होंगे जो कभी-कभी दशकों तक चलते थे। इन प्रतियों को उनके मालिकों द्वारा लोन लेने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और यह ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों का रिकॉर्ड रखने में भी मदद करेगा।

आबदी भूमि के किसी भी प्रकार के स्वामित्व रिकॉर्ड या सीमांकन के अभाव के कारण, जब भी कब्जे, जल निकासी, या सीमाओं के बारे में कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो पार्टियों को विवादों के निपटारे के लिए एक नागरिक अदालत में जाना पड़ता है, एक लंबी प्रक्रिया जो कभी-कभी पीढ़ियों  तक चलती है, हमारे देश की दीवानी अदालतों में लंबित मामलों की कुल संख्या में से, कम से कम 40% विवादित भूमि से संबंधित हैं

संपत्ति के स्वामित्व की अवधारणा क्रेडिट तक पहुंचने और गरीबों की वित्तीय स्थिति में सुधार करने का एक तरीका है। यह न केवल ग्रामीण घरेलू मालिकों को अपने घरों को ऋण के लिए जमानत के रूप में उपयोग करने में सक्षम करेगा, बल्कि महंगी ग्रामीण मुकदमेबाजी में भी कटौती करेगा।

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